वर्ल्ड बैंक ने अनुमान लगाया है कि भारत 2018-19 में दुनिया में सबसे तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था वाला देश बना रहेगा. मंगलवार को जारी एक रिपोर्ट में विश्व बैंक ने कहा कि चालू वित्त वर्ष के दौरान भारत का सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) 7.3 फीसदी की दर से बढ़ेगा. इसकी तुलना में चीन का विकास दर 6.3 प्रतिशत ही रहने की उम्मीद है.
'ग्लोबल इकोनॉमिक प्रॉस्पेक्ट्स: डार्कनिंग स्काइज़' रिपोर्ट में कहा गया है कि इस वित्तीय वर्ष में अधिकांश विश्व की अर्थव्यवस्थाओं की रफ्तार धीमी रहेगी. हालांकि, इस रिपोर्ट में भारत और दक्षिण एशियाई क्षेत्र के लिए उज्जवल तस्वीर दिखाई गई है.
वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) को लागू करने के नरेंद्र मोदी सरकार के फैसले पर वर्ल्ड बैंक की रिपोर्ट में कहा गया है, “भारत में जीएसटी की हालिया शुरूआत और नोटबंदी के कदम ने अनौपचारिक क्षेत्रों को औपचारिक क्षेत्र में बदलने के लिए प्रोत्साहित किया है."
अर्थव्यवस्था में फिर आ रही तेजी
वर्ल्ड बैंक के अनुसार, भारत की GDP 2018-19 में 7.3 प्रतिशत की दर से बढ़ेगी. यह अगले दो वित्तीय वर्षों में 7.5 प्रतिशत तक पहुंच जाएगा. जीडीपी में यह बढ़त बढ़ी हुई खपत और निवेश का परिणाम है. नोटबंदी और जीएसटी के कारण अस्थायी मंदी के बाद अर्थव्यवस्था में फिर से तेजी आ रही है.
वर्ल्ड बैंक की रिपोर्ट में कहा गया है कि 2017 में भारत की अर्थव्यवस्था में जीएसटी और नोटबंदी के कारण गिरावट गिरावट आई थी. 2017 में चीन का विकास दर 6.9 प्रतिशत रहा, जबकि भारत की जीडीपी वृद्धि 6.7 प्रतिशत थी. वर्ल्ड बैंक प्रॉस्पेक्ट्स के ग्रुप डायरेक्टर अहान कोसे ने कहा कि भारत का ग्रोथ आउटलुक अभी भी मजबूत है. भारत अब भी सबसे तेजी से बढ़ती बड़ी अर्थव्यवस्था है.
वहीं मंगलवार को लगातार तीसरे कारोबारी दिन शेयर बाजार में तेजी का रुख रहा. सेंसेक्स 130 अंक चढ़ गया जबकि निफ्टी 10,800 अंक के स्तर से ऊपर निकल गया. तीन दिन की तेजी में सेंसेक्स 460 से ज्यादा अंक चढ़ चुका है. बता दें कि चीन के शेयर बाजार बुधवार को मजबूती के साथ खुले. शंघाई कंपोजिट सूचकांक 0.39 प्रतिशत की मजबूती के साथ 2,536.42 पर खुला. समाचार एजेंसी सिन्हुआ के अनुसार, शेनजियान कंपोनेंट सूचकांक 0.46 प्रतिशत की मजबूती के साथ 7,425.63 पर खुला.
भारतीय मुद्रा रुपये में डॉलर के मुकाबले पिछले सत्र से बढ़त देखी गई. रुपया बुधवार को डॉलर के मुकाबले पिछले सत्र से 15 पैसे की बढ़त के साथ 70.05 पर खुला. पिछले सत्र में रुपये में कमजोरी आई थी, जिसकी मुख्य वजह अंतर्राष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल में आई तेजी रही है. कमोडिटी विश्लेषक बताते हैं कि अंतर्राष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल के भाव में तेजी आने से भारत में तेल आयात के लिए ज्यादा डॉलर की जरूरत होगी, इसलिए रुपये पर दबाव आया, हालांकि पिछले सत्र के मुकाबले रुपया थोड़ा संभला है.
उधर, दुनिया की छह प्रमुख मुद्राओं के मुकाबले डॉलर की ताकत का सूचकांक डॉलर इंडेक्स बुधवार को फिर 0.11 नीचे फिसलकर 95.377 के स्तर पर आ गया. दरअसल, इन छह मुद्राओं के समूह में सबसे अधिक भारांक वाली मुद्रा यूरो और आस्ट्रेलियन डॉलर व ब्रिटिश पौंड में डॉलर के मुकाबले मजबूती रही, जबकि जापानी येन में कमजोरी दर्ज की गई.
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