Thursday, November 22, 2018

अयोध्या पहुंचने लगे शिवसैनिक, संजय राउत ने किया भूमि पूजन

राम मंदिर निर्माण को लेकर शिवसेना सुप्रीमो उद्धव ठाकरे अपने लाव-लश्कर के साथ अयोध्या पहुंचने वाले हैं. वो पुणे जिले में शिवनेरी किले की मिट्टी को एक कलश में भरकर अपने साथ अयोध्या लाएंगे. यह मिट्टी राम जन्मभूमि के महंत को दी जाएगी.

इस बीच, शिवसेना कार्यकर्ता अयोध्या पहुंच गए हैं. पार्टी के वरिष्ठ नेता और सांसद संजय राउत ने गुरुवार को अयोध्या में लक्ष्मण किले पर भूमि पूजन किया. बता दें कि उद्धव ठाकरे अयोध्या की जमीन से राम मंदिर निर्माण की हुंकार भरेंगे. इसके लिए वे शनिवार को दो दिनोंके दौरे पर अयोध्या पहुंच रहे हैं. वो अयोध्या में पुजारियों और साधु-संतों के साथ बैठक भी करेंगे.

'हर हिंदू की यही पुकार, पहले मंदिर फिर सरकार'

'हर हिंदू की यही पुकार पहले मंदिर फिर सरकार' यह नारा शिवसेना सुप्रीमो उद्धव ठाकरे ने अपने अयोध्या दौरे के पहले दिया है. उनका कहना है कि बीजेपी के लिए 15 लाख रुपए हर शख्स के खाते में डालने जैसा जुमला राम मंदिर भी है. लेकिन अब ऐसा नहीं होगा. जब तक राम मंदिरनहीं बनेगा तब तक सरकार भी नहीं बनेगी. 

क्या होगा कार्यक्रम..

बता दें कि उद्धव ठाकरे अयोध्या में रामलला के दर्शन करने के साथ ही सरयू तट पर पूजा- अर्चना भी करेंगे. इसके बाद वो साधु-संतों के साथ चर्चा करेंगे. उद्धव का कहना है कि लोकसभा चुनाव के पहले राम मंदिर के निर्माण का रास्ता साफ हो जाना चाहिए. उधर, बुधवार को मुंबईसे रवाना हुआ शिवसेना कार्यकर्ताओं का एक जत्था भी अयोध्या पहुंचने वाला है.

रोजगार का वादा खोखला

मनमोहन सिंह ने केंद्र की मोदी सरकार पर हमला करते हुए कहा कि 2014 में मोदी ने हर साल देश में 2 करोड़ नौकरी देने का वादा किया था, लेकिन आज वह वादा पूरा नहीं किया जा सका. श्रम विभाग से मिली जानकारी के अनुसार, हर तिमाही में महज कुछ हजार ही नौकरी मिल सकी है. रोजगार देने का सरकार का वादा खोखला निकला. मध्य प्रदेश के युवाओं को भी रोजगार नहीं मिल रहा.

उन्होंने केंद्र सरकार की आलोचना करते हुए कहा कि मोदी जी ने हर किसी के बैंक खाते में 15-15 लाख देने का वादा किया था, लेकिन इस बारे में क्या हुआ. मोदी सरकार भ्रष्टाचार को बढ़ावा दे रही है. हमने राफेल डील पर जेपीसी की मांग की थी, लेकिन अभी तक इस पर कुछ नहीं हुआ.

व्यापम राज्य में महाघोटाला

उन्होंने राज्य सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि मध्य प्रदेश में किसानों की समस्या बहुत ज्यादा है. राज्य सरकार ने किसानों की समस्या पूरा करने में नाकाम रही है. राज्य में व्यापम जैसा महाघोटाला हुआ. उन्होंने कहा कि हमारी सरकार ने कभी भी किसी भी सरकार के साथ भेदभाव नहीं किया था. हमने मध्य प्रदेश के साथ कभी भेदभाव नहीं किया, शिवराज सिंह चौहान इसके गवाह हैं.

Monday, November 12, 2018

क्यों ठंडा पड़ा टीपू सुल्तान के नाम पर दिखने वाला उन्माद?

कर्नाटक में सत्ता समीकरण बदलते ही उस उन्माद पर ठंडा पानी पड़ गया लगता है, जो बीते चार साल के दौरान टीपू सुल्तान की जयंती के मौके पर होने वाले जश्न और विरोध को लेकर दिखता था.

राज्य में राजनीतिक समीकरण बदलने का असर सुरक्षा इंतज़ामों पर भी दिखा.

टीपू सुल्तान की जयंती पर क़ानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए 57 हज़ार पुलिसकर्मियों को तैनात किया गया. इनमें से करीब तीन हज़ार पुलिसकर्मी राज्य की राजधानी बेंगलुरू में तैनात किए गए.

मुख्यमंत्री और जनता दल (सेक्युलर) के नेता एचडी कुमारस्वामी राज्य सचिवालय में हुए मुख्य कार्यक्रम में मौजूद नहीं थे. उन्होंने अपनी गैरमौजूदगी की वजह स्वास्थ्य कारणों को बताया.

कार्यक्रम के आधिकारिक निमंत्रण पत्र में भी उनके नाम का ज़िक्र नहीं था.

'अंधविश्वास पर यकीन नहीं'
कुमारस्वामी की गैरमौजूदगी को लेकर आलोचकों ने बीते सालों के उनके बयान को याद दिलाया जब वो कहा करते थे, "जन्मदिन मनाने से समाज को कोई फ़ायदा नहीं होगा."

आलोचनाओं का पूर्वानुमान लगाते हुए कुमारस्वामी ने टीपू सुल्तान के प्रगतिशील कामों और नई खोज के लिए उनकी कोशिशों की सराहना की.

कुमारस्वामी ने एक बयान में कहा, "(डॉक्टर की सलाह पर कार्यक्रम में हिस्सा नहीं लेने का) कोई विशेष अर्थ खोजना अनावश्यक होगा. इस बात में कोई सत्यता नहीं है कि ऐसा मैं इस डर से कर रहा हूं कि मेरी कुर्सी चली जाएगी. मेरा अंधविश्वासों में कोई यकीन नहीं है."

भारतीय जनता पार्टी हमेशा टीपू सुल्तान की जयंती पर होने वाले कार्यक्रमों का ज़ोरदार विरोध करती रही थी, लेकिन इस बार उनके प्रदर्शनों में भी वो धार नहीं दिखी.

राजधानी बेंगलुरू में कार्यक्रम के एक दिन पहले छोटा प्रदर्शन हुआ. भारतीय जनता पार्टी की राजनीति के लिहाज से अहम कोडागू और मैसूर ज़िलों में भी अमूमन शांति रही. सिर्फ़ मुट्ठीभर लोगों ने टीपू सुल्तान के ख़िलाफ़ नारेबाज़ी की.

'सरकार के दोहरे मानदंड'
टीपू सुल्तान ने साल 1766 में अपने पिता हैदर अली के साथ अंग्रेज़ों के ख़िलाफ़ मैसूर की पहली जंग में हिस्सा लिया था. उस वक़्त उनकी उम्र 15 साल थी. साल 1799 में श्रीरंगपट्टनम की चौथी जंग के दौरान युद्ध के मैदान में उनकी मौत हुई थी.

भारतीय जनता पार्टी के प्रवक्ता एस प्रकाश ने कहा, "विरोध के सुर धीमे करने की बात नहीं है. ऐसा नहीं है कि हम टीपू का विरोध करते हैं तो हम बंद बुलाएं और क़ानून-व्यवस्था की दिक्कत पैदा हो. हम सिर्फ़ इस सरकार के दोहरे मानदंड उजागर करना चाहते हैं. मुख्यमंत्री ख़ुद उपस्थित नहीं थे और कांग्रेस पार्टी से आने वाले उपमुख्यमंत्री विदेश चले गए."