Monday, November 12, 2018

क्यों ठंडा पड़ा टीपू सुल्तान के नाम पर दिखने वाला उन्माद?

कर्नाटक में सत्ता समीकरण बदलते ही उस उन्माद पर ठंडा पानी पड़ गया लगता है, जो बीते चार साल के दौरान टीपू सुल्तान की जयंती के मौके पर होने वाले जश्न और विरोध को लेकर दिखता था.

राज्य में राजनीतिक समीकरण बदलने का असर सुरक्षा इंतज़ामों पर भी दिखा.

टीपू सुल्तान की जयंती पर क़ानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए 57 हज़ार पुलिसकर्मियों को तैनात किया गया. इनमें से करीब तीन हज़ार पुलिसकर्मी राज्य की राजधानी बेंगलुरू में तैनात किए गए.

मुख्यमंत्री और जनता दल (सेक्युलर) के नेता एचडी कुमारस्वामी राज्य सचिवालय में हुए मुख्य कार्यक्रम में मौजूद नहीं थे. उन्होंने अपनी गैरमौजूदगी की वजह स्वास्थ्य कारणों को बताया.

कार्यक्रम के आधिकारिक निमंत्रण पत्र में भी उनके नाम का ज़िक्र नहीं था.

'अंधविश्वास पर यकीन नहीं'
कुमारस्वामी की गैरमौजूदगी को लेकर आलोचकों ने बीते सालों के उनके बयान को याद दिलाया जब वो कहा करते थे, "जन्मदिन मनाने से समाज को कोई फ़ायदा नहीं होगा."

आलोचनाओं का पूर्वानुमान लगाते हुए कुमारस्वामी ने टीपू सुल्तान के प्रगतिशील कामों और नई खोज के लिए उनकी कोशिशों की सराहना की.

कुमारस्वामी ने एक बयान में कहा, "(डॉक्टर की सलाह पर कार्यक्रम में हिस्सा नहीं लेने का) कोई विशेष अर्थ खोजना अनावश्यक होगा. इस बात में कोई सत्यता नहीं है कि ऐसा मैं इस डर से कर रहा हूं कि मेरी कुर्सी चली जाएगी. मेरा अंधविश्वासों में कोई यकीन नहीं है."

भारतीय जनता पार्टी हमेशा टीपू सुल्तान की जयंती पर होने वाले कार्यक्रमों का ज़ोरदार विरोध करती रही थी, लेकिन इस बार उनके प्रदर्शनों में भी वो धार नहीं दिखी.

राजधानी बेंगलुरू में कार्यक्रम के एक दिन पहले छोटा प्रदर्शन हुआ. भारतीय जनता पार्टी की राजनीति के लिहाज से अहम कोडागू और मैसूर ज़िलों में भी अमूमन शांति रही. सिर्फ़ मुट्ठीभर लोगों ने टीपू सुल्तान के ख़िलाफ़ नारेबाज़ी की.

'सरकार के दोहरे मानदंड'
टीपू सुल्तान ने साल 1766 में अपने पिता हैदर अली के साथ अंग्रेज़ों के ख़िलाफ़ मैसूर की पहली जंग में हिस्सा लिया था. उस वक़्त उनकी उम्र 15 साल थी. साल 1799 में श्रीरंगपट्टनम की चौथी जंग के दौरान युद्ध के मैदान में उनकी मौत हुई थी.

भारतीय जनता पार्टी के प्रवक्ता एस प्रकाश ने कहा, "विरोध के सुर धीमे करने की बात नहीं है. ऐसा नहीं है कि हम टीपू का विरोध करते हैं तो हम बंद बुलाएं और क़ानून-व्यवस्था की दिक्कत पैदा हो. हम सिर्फ़ इस सरकार के दोहरे मानदंड उजागर करना चाहते हैं. मुख्यमंत्री ख़ुद उपस्थित नहीं थे और कांग्रेस पार्टी से आने वाले उपमुख्यमंत्री विदेश चले गए."

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